March 23, 2011

योद्धा

गर्वित सीना ,
आवरण और कवच
सागर और रेत की गर्माहट में
सीमान्त की रेखा |

ये युद्ध है ,
तुम्हारा उत्तरदायित्व है, लड़ना
और जीतना |
यह तुम्हारी नियति है ,
यह तुम्हारा धर्म है |

आग्रह नहीं था किसीका ,
न ही विकल्प था |
बस परिपक्वता का उपहार था ,
प्रतिष्ठा थी संदूक में बंद ,
सीमा के पार |

अब निभाओ उसे ,
तलवार उठाओ ,
जंग लगी ढाल संभालो ,
कवच से ढकी देह को उद्दत करो
और जाओ वहां ,
जहाँ की भूमि में वासना है , लालसा है |

बहते रक्त में बलिदान ढूँढो ,
रणभेरी के शोर में विजय ढूँढो |
लाल तिलक की गरिमा को सार्थक करो ,
क्योंकि  पराक्रम की परिभाषा तो किसी ने नहीं लिखी |

यहाँ कोई पार्थ नहीं , कोई अर्जुन नहीं है |
यहाँ न न्याय है न सत्य |
यहाँ बस युद्ध है , शौर्य है  ,पौरुष है |

वीर बनो , बलिदान मांगो |
तुम योद्धा हो ,
जाओ लड़ो |

3 comments:

  1. awsum one...can bring lyf inside a dead person also..and at d same tym can motivate any warrior 2 fyt till d last breathe..keep writing..wish u more talent and success...all d best.god bless!!!!

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  2. surfing thru blogger, juz came across your blog.. luvly writing skills.. n that too in hindi.. its worth appreciating.. its not very common today to c people interested in hindi writings.. so congrats for dat.. keep up d gud work.

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